वर्ष 2011 की भाषायी जनगणना और गैर अनुसूचित मातृभाषा कुँड़ुख़

वर्ष 2011 की भाषायी जनगणना रिर्पोट देश के जनमानस के लिए समर्पित है। Census of India – 2011 (Linguistc) के अनुसार भारत में कलु 121 अनुसूचित तथा गैर अनुसूचित भाषाओ को 05 भाषा परिवार समूहों में वर्गीकृत किया गया है| इनमे से 22 भाषाओ को 8वी अनुसूची में स्थान प्राप्त हुआ है| इन 22 में…Continue reading वर्ष 2011 की भाषायी जनगणना और गैर अनुसूचित मातृभाषा कुँड़ुख़

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पुना तुङुल

उराँव (कुँड़ुख़) जनजातीय समाज ने अपनी आदि परम्पराओं एवं मान्यताओं को निभाते हुए अपनी लिपि का निमार्ण किया है जिसे ”तोलोङ सिकि“ कहते हैं। तोलांग सिकि के निर्माण के कार्य को पुना तुङुल (नया स्वप्न) को पुस्तक के रूप में लाने का श्रेय चिकित्सक डॉ0 नारायण उराँव को जाता है।