Eklavya

भाग 2: आदिवासी (Tribal) महानायक गुरूभक्त एकलव्य (अंगुठा कटने के बाद)

अकसरहाँ यह प्रश्न उठता है कि महाभारत ग्रंथ का गुरूभक्त एकलव्य का दायाँ अंगुठा दक्षिणा में दिये जाने के बाद का प्रसंग, महाभारत में कहीं भी नहीं आया है। क्या, महाभारत में गुरूभक्त एकलव्य का प्रसंग दलितों एवं आदिवासियों के उच्च कौशल को दबाये जाते रहने का द्योतक है? या फिर कुछ और ! एक ओर तो महाभारत ग्रंथमें एकलव्य को भूतो न भविष्यति गुरूभक्त एकलव्य कहा गया। पर आज का दलित-आदिवासी समाज, अपने पूर्वजों के इतिहास पर गर्व कर पाने में सकुचा रहा है। क्या इसके पीछे ऐसी ही मनोवृति जगाने की रही थी ? खैर, कारण जो भी रहा हो, एकलव्य का मान मर्दन तो हुआ ही।

उपरोक्त प्रश्नों का उत्तर ढूँढ़ने के लिए संस्कृत साहित्य का अध्ययन करने से पता चलता है कि गुरूभक्त एकलव्य ने जो भी किया वह अपने होशो हवास में किया और उसका डटकर सामना किया। अंगुठा कटने के बाद, वह निढाल नहीं रहा। उसने अंगुठे के बिना ही तीरंदाजी में निपुणता हासिल कर ली और अपने पिता हिरण्यधनुका की मृत्यु के पश्चात् अपने कबिला का मुखिया बने। हरिवंश पुराण में वर्णित कथाओं में बतलाया गया है कि एकलव्य का भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम के साथ घोर संग्राम हुआ और कई बार हुआ। उस संग्राम में कभी बलराम जी भारी पड़ते, तो कभी एकलव्य। पर एकलव्य को बलराम के हाथों मारे जाने का वर्णन नहीं है। वहीं दुसरी ओर यू-ट्यूब में प्रसारित कई एनिमेसन फिल्मों के माध्यम से बतलाया गया कि एकलव्य का वध स्वयं भगवान कृष्ण ने किया। तो क्या, अंगुठा कटने के बाद भी भगवान कृष्ण के लिए एकलव्य सबसे बड़ा बाधक बन गये थे ? ऐतिहासिक शोध के पश्चात् बने उन फिल्मों के माध्यम से यह कहा गया है कि एकलव्य अपने राज्य का मुखिया अथवा राजा बनने के बाद मगध नरेश जरासंघ की सेना की ओर से मथुरा पर कई बार आक्रमण किये। जैसा कि हरिवंश पुराण में बलराम और एकलव्य के बीच घोर संग्राम का उद्धरण है। इस संग्राम में एकलव्य की वीरता को देख सभी चकित थे। मथुरा की यदुवंशी सेना के बड़े-बड़े शूर-वीर एवं योद्धा जब वीरगति को प्राप्त होने लगे और यदुवंशी सेना का खात्मा होने लगा तो भगवान कष्ष्ण को स्वयं आना पड़ा और मथुरा नगरी एवं यदुवंश को बचाने के लिए एकलव्य का वध कर दिये। अर्थात अंगुठा कटे एकलव्य के पराक्रम ने स्वयं भगवान कृष्ण को भी ललकारा और भगवान के हाथों वीरगति को प्राप्त हुए।

 

एनिमेसन फिल्म के माध्यम में कहा गया है कि स्वयं भगवान कृष्ण ने अर्जून की वीरता का बखान करते हुए महाभरत में स्वीकारा है – कि तुम्हें संसार का श्रेष्ठ धनुर्घर कहलवाने के लिए मैंने तुम्हारे प्रेम में भीष्म पितामह को वध करवाया, महापराक्रमी कर्ण को कमजोर किया और महावीर एकलव्य का वध किया।

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