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पुना तुङुल

उराँव (कुँड़ुख़) जनजातीय समाज ने अपनी आदि परम्पराओं एवं मान्यताओं को निभाते हुए अपनी लिपि का निमार्ण किया है जिसे ”तोलोङ सिकि“ कहते हैं। तोलांग सिकि के निर्माण के कार्य को पुना तुङुल (नया स्वप्न) को पुस्तक के रूप में लाने का श्रेय चिकित्सक डॉ0 नारायण उराँव को जाता है।