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देवनागरी लिपि में कुड़ुख़ (Kurukh) भाषा की लेखन समस्या और समाधान

दिनांक 11.07.2011 दिन सोमवार को संध्या 6ः00 बजे कार्तिक उराँव कुड़ुख़ लूरकुड़िया, करमटोली चौक, राँची के परिसर में कुड़ुख़ भाषा की लेखन समस्या और समाधान विषयक विचार गोष्ठी विशप डॉ0 निर्मल मिंज की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में डॉ0 हरि उराँव, डॉ0 नारायण भगत, डॉ0 श्रीमती शान्ति खलखो, फ़ा0 अगस्तिन केरकेट्टा, डॉ0 नारायण उराँव ’’सैन्दा’’ तथा श्री पॉल मूंजनी उपस्थित थे।

गोष्ठी में डॉ0 निर्मल मिंज ने कहा कि – वर्तमान में कँुड़ुख़ भाषा के लेखन में एकरूपता लायी जानी चाहिए। इस समस्या का समाधान वर्तमान तकनीक एवं भाषा विज्ञान को आधार मानकर ही किया जाना चाहिए। कुँड़ुख़ भाषा की लेखन समस्या के समाधान हेतु भाषा विज्ञान एवं आधुनिक हिन्दी साहित्यकारों द्वारा दिये गये सुझाव पर अमल किये जाने की आवष्यकता है। भाषाविदों के अनुसार – कुँड़ुख़ भाषा, उतरी द्रविड़ भाषा समूह की भाषा है। हिन्दी साहित्यकारों द्वारा आधुनिक द्रविड़ भाषा की लम्बी ध्वनि (Long Phone) को लिखने के लिए ’’ : ’’ (कॉलन/उपविराम) चिह्न का प्रयोग किया जाता है, जो तकनीकि दृष्टि से बेहतर है। इसी तरह कुँड़ुख़ भाषा में उच्चरित हेचका हरह (Glotal Stop ) को कुँड़ुख़ भाषियों द्वारा ’’ अ् ’’ चिह्न से लिखा जाना स्वागत योग्य है तथा शब्द खण्ड सूचक (Syllable Index) के लिए ’’ ’ ’’ (अपॉस्ट्रोफी) का प्रयोग किया जाना सराहनीय कदम है। साथ ही कुँड़ुख़ भाषा की अपनी लिपि तोलोंग सिकि जो एक भाषा वैज्ञानिक आधार वाली लिपि है, को पढ़ाई-लिखाई में स्थान दिया जाना चाहिए, तभी वर्तमान भूमण्डलीकरण के दौर में अपनी भाषा-संस्कृति को बचा पाएंगे। इसके अतिरिक्त गणित के अनुसार, संख्या का मानकीकरण 10 के गुणांक में की जानी चाहिए।

उपरोक्त अवधारणाओं पर अपना मंतव्य रखते हुए मैंने (डॉ0 नारायण उराँव ’’सैन्दा’’) कहा कि – इग्नू के पाठ्यक्रम (एम0एच0डी0-6) में द्रविड़ भाषा की लम्बी ध्वनि के लिए तथा हिन्दी साहित्य के विद्वान फ़ा0 कामिल बुल्के की पुस्तक अंग्रेजी हिन्दी षब्दकोष में लम्बी ध्वनि के लिए ‘ : ’ चिह्न का व्यवहार किया गया है। इसे झारखण्ड के वयोवृद्ध हिन्दी साहित्यकार डॉ0 दिनेश्वर प्रसाद द्वारा भी समर्थन किया गया है।

उपरोक्त विचारों पर अपनी बातें रखते हुए डॉ0 हरि उराँव, डॉ0 नारायण भगत एवं डॉ0 श्रीमती शान्ति खलखो ने कहा कि भाषा-विज्ञान एवं तकनीकि सम्मत बातों को आवश्यकतानुसार स्वीकार करना होगा अन्यथा हम पीछे रह जाएंगे। परिचर्या में अपनी बात रखते हुए डॉ0 हरि उराँव ने स्पष्ट किया कि लम्बी ध्वनि के लिए “ : “ (कॉलन) चिह्न व्यवहार किया जाना IPA (International Phonetic Alphabets) के अनुरूप ही है। वहीं पर हेचका हरह ध्वनि के लिए “अ्“ चिह्न को स्वीकार किये जाने से लिखने, पढ़ने और समझने में आसानी होगी। शब्द खण्ड सूचक चिह्न के स्थान पर ’’ ’ ’’ (अपॉस्ट्रोफी) का चुनाव किया जाना पूर्व की भांति है जिसे पहले ही स्वीकार किया जा चुका है। इस मुद्दे पर डॉ0 नारायण भगत ने अपने विचार में कहा कि इन विन्दुओं पर सामुहिक निर्णय हो और साहित्य सृजन के कार्य में तेजी लायी जाए।

अंत में फ़ा0 अगुस्तिन केरकेट्टा ने अपना विचार रखते हुए कहा कि – अब समय कार्य करने का है, साहित्य सृजन का है। हमलोग कई बार निर्णय लेते हैं किन्तु काम नहीं हो पाया है। अपनी जाति, भाषा और संस्कृति को बहुसंख्यक समाज के सामने लाने के लिए अपनी लिपि की आवश्यकता है और समाज के पास तोलोंग सिकि लिपि है, जिसे झारखण्ड सरकार ने वर्ष 2003 में ही राजनैतिक मान्यता दे रखी है। इसी तरह देवनागरी लिपि से लिखने समय उठ रही समस्याओं का समाधान उपरोक्त तकनीकि जानकारों का सुझाव सराहनीय एवं सुग्रहाय है।

गोष्ठी के अन्त में सर्वसहमति से निर्णय लिया गया कि :-2
1. कुँड़ुख़ भाषा की लम्बी ध्वनि को दिखाने के लिए स्वर के बाद “ : “ (कॉलन) चिह्न दिया जाय। जैसे –
एःड़ा, ओःड़ा, मोःड़ा, जोःड़ा, चाँःड़े-चाँःड़े, कोंःड़ा-कोंःड़ा।
2. हेचका हरह के लिए “अ़“ चिह्न दिया जाय। जैसे – नेअ़ना, चिअ़ना, बअ़ना, होअ़ना।
3. शब्द खण्ड सूचक के लिए ’’ ’ ’’(अपॉस्ट्रोफी) चिह्न दिया जाय। जैसे – बरई-बर’ई।
4. तोलोंग सिकि (लिपि) को पठन-पाठन के पाठ्यक्रम में शामिल किये जाने की व्यवस्था करवायी जाय।
जैसे –
5. कुँड़ुख़ गिनती को गणित एवं विज्ञान पर आधारित 10 के गुणक में तैयार किया जाय।

संदर्भ सूची :-
1. अंग्रेजी हिन्दी शब्दकोष : फ़ादर कामिल बुल्के, पृष्ठ – प्ग्.
2. एम0एच0डी0-6 : इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वद्यिालय, नई दिल्ली,
25.5 : द्रविड़ परिवार, पृष्ठ – 19.
3. KURUX PHONETIC READER, CIIL series – 9
: Dr. Fransis Ekka
4. IMPROVE YOUR PRONUNCIATION
-VICTOR W. TUCKER, S. J. ; P – I
5. Oxford English Hindi Dictionary
Edited by : S K Verma & R N Sahai, Page – Xii, Xiii

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