आसारी पुजा /हरियनी पुजा/हरियरी पुजा

कुँड़ुख़ खोंड़हा नु बेड़ा सिरे धरमे, धरती अयंग अरा धरमी सवंग गही पुजा-धजा हुल्लो परिया तिम मनतेम बरआ लगी। कुँड़ख़र, आल उज्जना गे अरा कोड़े उज्जना गे धरमे सवंगन सुमरारनर अरा गोहरारनर। कुँड़ुख़ खोंड़हा ता मुद्ध परब – फग्गु, ख़द्दी, पच्चो करम, राःजी करम, सोहरई गुट्ठी तली। इबड़ा परब नु पुजा-धजा संग्गे ओनना-मोःख़ना, रिज्झ-रंग गुट्ठी मनी। पहेंस जोक्क
पुजा-धजा टोला-पड़ा, खूट-खुटी, एड़पा-पल्ली, खूरी-बखड़े नु एकल मंज्जका ती परब लेखा पुल्ली मना। पहेंस जिया नु गा रिज्झ मनी दिम। एन्नेम पुजा-धजा नु – हरियनी पुजा (असारी पुजा), खरियनी पुजा, कदलेटा पुजा, डण्डा कट्टना पुजा गुट्ठी तली।

कुँड़ख़र मजही आसार चन्ददो गही बिल्ली पक्ख नु ओण्टा पुजा मनी। ई पुजा सिसई ,गुमला अबड़ा गने असार चन्ददो ही बिल्ली पक्ख मून्दता उल्ला (आषाढ़ शुक्ल पक्ष तृतीया) उल्ला मनतेम बरआ लगी। ई पुजा ही नाःमे असारी पुजा मलता हरियनी पुजा तली। इदी गही मने धरती हरियर रअ़ना अरा हरियर मनना गे धरमे अरा धरमी सवंग ती ओहरा-बिनती ननतार’ई।

 तूःकबूझ (उदेष्य) :- धरती गही हरियर मनना अरा हरियर रअ़ना गे पुजा। (असार चन्ददो खिती-पुती ननना अरा मनना ही बेड़ा तली। चेंःप-झड़ी, दःव बरखा मंज्जका ती खिती दःव मनो। खिती दःव मंज्जका ती आःलर दःव रओर। संग्गे-संग्गे धरती हरियर रअ़ना ती उरमी जिया-जउँत, मन्न-मास, ओःड़ा-ख़ाःख़ा उरमी दःव कुना रअ़ओ।)

गोहरारना किता (तरीका) :- ए दे धरमे, धरती अयंग, धरमी सवंग, पुरखा-पती, चन्ददो-बीःड़ी, — निमहँय तिंग्गका-एःदका बेसे एःम नना ओना लगदम अरा निमहँय तिंग्गका-एःदका बेसे इन्ना गोहरारआ लगदम। एमहँय बेलख़ा नु दःव कुना चेंःप-झड़ी तइके। दःव ताःका-पुलिन तइके। मलदव ताःका-पुली, रोःगे-बलयन तरकूःटी ननके। ए दे इन्ना एमहँय ओंग्गना जोःगे दूदही, पूँप, अतख़ा, नेःग झरा चिआ लगदम। एमहय चिच्चकन इंजिरकेदरा एमहय अरा एमहय बेलख़ा कोड़े रअ़ना गे आसिस चिअ़के।

पुजा नु लग्गना जिनिस :- अम्म, दुदही, नेःग झरा, धुप-धुवन, सिंदरी, पूना अड़ख़ा (कोदय अड़ख़ा), पुना ख़ंजपा (जम्मबु) सिरनी मिठई गुट्ठी।

बरजाचका कत्था :-

1. हरियनी पुजा उल्ला ती डहुड़ा कोरना गूःटी मलता करम खण्डरना गूःटी मलता करम परब         गूटी पतड़ा ता अतख़ा कडिरका गुट्ठिन मल्ला मुरूचना। अर्थात पेड़ पौधे को मजबूत होने           दिया जाना है।

2. सेन्दरा मल्ला काःना। अर्थात जंगल के जानवरों की संख्या वृद्धि का मौका देना है।

3. पाःही मल्ला काःना। अर्थात दूसरे जगह खाने-पीने से होने वाले संक्रमित पानी के रोग अर्थात       डायरिया, मियादी, हैजा आदि से बचना है।

4. पुना बेंज्जा-पाःही नेःगचार मल नननर।

5. सावन सतमी पुजा मनी।

मानसून पूर्वानुमान :-

1. ख़द्दी ती पच्चो करम – खरहाँत बरखा।

2. पच्चो करम ती हरयनी पुजा – अगहाँत बरखा।

3. हरयनी पुजा ती राःजी करम – मझ हाँत बरखा।

4. राःजी करम ती सोहरई – पछहाँत बरखा। मौसम पूर्वानुमान के संबंध में परम्परागत मौसमी
गीत इस प्रकार है –

1. आसारी जोःत बरा लगी भइया रे, गोला अड्डो एलेचा लगी रे।।
अम्बय एलचय गोला अड्डो, पछली बरेखा रअ़ई रे।

2. गुंगु निंगहयन सेवा ननय कोय, पछली बरेखा रअ़ई।

 

– श्री गजेन्दर उराँव
(व्याख्या : पड़हा कोटवार, सैन्दा, सिसई, गुमला)

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